anidaan
07-20-2009, 10:01 PM
साहिल तक लहर आती है
हर बार कुछ कह जाती है,
खामोशी के आलम से बयां
कैसे वो हर बार संवर जाती है,
उसके दिल की गहराई का पता नही
मगर कश्ती अक्सर यहां डूब जाती है,
ये लमहा-लमहा ज़िन्दगी से गुजरना
न जाने कब उसके आगोश मे सिमट जाती है.
हर बार कुछ कह जाती है,
खामोशी के आलम से बयां
कैसे वो हर बार संवर जाती है,
उसके दिल की गहराई का पता नही
मगर कश्ती अक्सर यहां डूब जाती है,
ये लमहा-लमहा ज़िन्दगी से गुजरना
न जाने कब उसके आगोश मे सिमट जाती है.