anidaan
07-16-2009, 03:01 PM
रास्ता चेहरा
मन्ज़िल आंखे
बाकी नही तलाश कोई,
चले भी तो क्या कदम
रास न आई
उम्मीदो की शाख कोई,
सिर्फ़ छांव ही
जरुरी नही
यकीन की हो धूप कोई,
अब तो मिले निदान कही
बाकी नही है वक्त का रुप कोई.
मन्ज़िल आंखे
बाकी नही तलाश कोई,
चले भी तो क्या कदम
रास न आई
उम्मीदो की शाख कोई,
सिर्फ़ छांव ही
जरुरी नही
यकीन की हो धूप कोई,
अब तो मिले निदान कही
बाकी नही है वक्त का रुप कोई.